Monday, October 20, 2014

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सरकार की सुस्त चाल से पिछड़ गया उत्तराखंड

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उच्च शिक्षा विभाग की सुस्ती के चलते केंद्र सरकार के राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) का लाभ अभी तक प्रदेश को नहीं मिल पा रहा है। जबकि देश के 17 राज्यों की ओर से भेजे गए प्रस्तावों का करोड़ों का भुगतान भी हो चुका है।

अन्य राज्यों ने अपने-अपने मॉडल स्कूल बनाने की सूची भेजकर मिलने वाली आर्थिक सहायता ले ली है। उत्तराखंड को केंद्र ने विशेष राज्य की श्रेणी में रखकर योजना में नब्बे फीसदी हिस्सेदारी देना तय किया है।

शुरू से ही लापरवाही
उत्तराखंड के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश और हिमाचल ने शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े जिलों के दर्जनों कालेजों को चिंहित कर केंद्र से अनुदान प्राप्त कर लिया है। जबकि उत्तराखंड में अभी उच्च शिक्षा परिषद के ढांचे का ही गठन हुआ है। केंद्र सरकार की इस योजना में परिषद के माध्मय से ही प्रस्ताव भेजे जाने अनिवार्य हैं।

उत्तराखंड ने रूसा को अपने राज्य में लागू करने में शुरू से ही लापरवाही बरती है, जबकि केंद्र सरकार ने अधिक लाभ पाने वाले नार्थ ईस्ट राज्यों की श्रेणी में उत्तराखंड और हिमाचल को सबसे पहले शामिल किया है।

नवम्बर में भेजा लेटर
रूसा का लाभ पाने के लिए केद्र सरकार की कुछ शर्तें राज्यों को पूरी करनी होती हैं। उत्तराखंड ने केंद्र को भेजा जाने वाला कमिटमेंट लेटर नवंबर के आखिर में भेजा। साथ ही उत्तराखंड को जीएसडीपी में उच्च शिक्षा पर दो फीसदी खर्च करने की घोषणा करनी पड़ी। उच्च शिक्षा पर अभी राज्य की तरफ से मात्र 0.14 फीसदी ही खर्च होता है।

उच्च शिक्षा परिषद का गठन 'रूसा' योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। विभाग के पास अभी तक शिक्षाविदों व विशेषज्ञों के नामों का पैनल भी नहीं आया है। ऐसे में परिषद की पहली बैठक कब होगी और प्रस्ताव कब भेजे जाएंगे।
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